गुरु तत्व

नाथ परंपरा

ध्यान एवं साधना परंपरा — गुरु कृपा से ही सिद्धि

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः।

गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश हैं

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गुरु परंपरा वृक्ष

गुरु परंपरा एक जीवित चेतना है, जो काल से काल तक प्रवाहित होती है।

ज्ञान प्रवाह
ज्ञान प्रवाह
ज्ञान प्रवाह
ज्ञान प्रवाह
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• शिवोऽहम् •

गुरु का महत्व

तंत्र और योग की साधना में गुरु का स्थान सर्वोपरि है। गुरु वह दिव्य ज्योति हैं जो अज्ञान के अंधकार को मिटाकर शिष्य को आत्मज्ञान की ओर ले जाती हैं।

नाथ परंपरा में गुरु-शिष्य परंपरा अत्यंत पवित्र मानी जाती है। गुरु की कृपा के बिना कोई भी साधना पूर्ण नहीं हो सकती।