Pran Pratishtha
दिव्य प्रतिष्ठा

प्राण प्रतिष्ठा

मूर्ति में जीवन का संचार

वैदिक विधि
महत्वपूर्ण जानकारी

मूर्ति प्रतिष्ठा की विधि

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श्री सत्य सनातन अखाड़ा द्वारा जनसेवा और धर्मसेवा के पवित्र उद्देश्य से देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापना और प्राण प्रतिष्ठा पूजन जैसे दिव्य अनुष्ठानों का आयोजन पूरे विधिविधान और शास्त्रोक्त नियमों के अनुसार किया जाता है।

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यह अखाड़ा निःस्वार्थ भाव से समाज के कल्याण हेतु हर उस स्थान पर जहां श्रद्धा और आस्था का केंद्र बनता है — चाहे वह कोई मंदिर हो या किसी भक्त का घर — वहां पूर्ण शुद्धता और वैदिक मर्यादा के साथ मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन करता है।

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यह संपूर्ण प्रक्रिया यजमान की श्रद्धा और देवी-देवताओं की कृपा से सम्पन्न होती है। मंत्रोच्चारण, हवन, आवाहन, न्यास और विविध पूजन विधियों के माध्यम से मूर्ति में दिव्य ऊर्जा का आह्वान कर उसे सजीव किया जाता है।

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श्री सत्य सनातन अखाड़ा की विशेषता यह है कि यह समस्त पूजन और अनुष्ठान पूर्णतया निःशुल्क किए जाते हैं। श्रद्धालुओं से किसी प्रकार का धन या दक्षिणा नहीं ली जाती, क्योंकि यह अखाड़ा अपने तप, सेवा और आध्यात्मिक अनुशासन के बल पर इस प्रकार के दैवीय कार्यों को संपन्न करता है।

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इस तरह श्री सत्य सनातन अखाड़ा समाज में धर्म का प्रचार-प्रसार करते हुए प्रत्येक घर और मंदिर में दिव्यता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के लिए सदैव तत्पर रहता है।

50+

मूर्तियां स्थापित की गईं

8000+

कुल आगंतुक

100+

मंदिर व घर

150+

स्वयंसेवकगण

पवित्र क्षण

गैलरी

Pran Pratishtha 1
Pran Pratishtha 2
Pran Pratishtha 3

विशेष सूचना

  • सभी प्रतिष्ठा कार्य पूर्णतः निःशुल्क किए जाते हैं।
  • वैदिक विधि और शास्त्रों के अनुसार कार्य संपन्न होता है।
  • घर और मंदिरों दोनों में प्रतिष्ठा की सुविधा उपलब्ध है।