Navratri Maha-Ayojan
पवित्र महोत्सव

नवरात्रि महाआयोजन

शक्ति की उपासना एवं सांस्कृतिक महोत्सव

9 दिव्य देवियाँ
महत्वपूर्ण जानकारी

नवरात्रि का महत्व

1

श्री सत्य सनातन अखाड़ा द्वारा प्रतिवर्ष चैत्र, शारदीय एवं गुप्त नवरात्रियों के पावन अवसर पर भव्य धार्मिक आयोजन अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से किया जाता है। यह आयोजन आध्यात्मिक जागरण और सनातन परंपरा के संरक्षण का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। प्रत्येक वर्ष यह आयोजन श्रद्धालुजनों के लिए एक आध्यात्मिक पर्व जैसा होता है, जिसमें हजारों की संख्या में भक्तगण सम्मिलित होकर आयोजन की दिव्यता और भव्यता का आनन्द लेते हैं।

2

नवरात्रि की शुरुआत कलश यात्रा के साथ होती है, जिसमें भक्तगण भक्ति भाव से सराबोर होकर देवी का आवाहन करते हैं। इसके उपरांत अखंड दीप की स्थापना की जाती है जो पूरे नवरात्रि काल में प्रज्वलित रहता है, यह देवी माँ की कृपा का प्रतीक माना जाता है। यज्ञ, अनुष्ठान एवं वैदिक मंत्रोच्चार से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है।

3

माता का दिव्य श्रृंगार और पूजा विधिविधान से की जाती है, जिसमें माँ को चुनरी अर्पित की जाती है और भक्ति रस में डूबी चुनरी यात्रा का आयोजन होता है। श्रद्धालु भजन, कीर्तन, और आरती के माध्यम से अपनी आस्था प्रकट करते हैं। नव कन्या पूजन और कन्या भोज इस आयोजन का एक पवित्र अंग होता है, जिसमें कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर ससम्मान भोजन कराया जाता है।

4

इस अवसर पर श्री चंडी यज्ञ, श्री दुर्गा सप्तशती पाठ तथा नवदुर्गा पूजन अत्यंत विधिपूर्वक संपन्न होता है, जिससे वातावरण देवीमय हो उठता है। संपूर्ण आयोजन धर्म जागरण का माध्यम बनता है, जिसमें जनमानस को सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।

5

यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि एक आत्मिक अनुभूति है, जो भक्तों के हृदय में भक्ति, सेवा, और संस्कारों की लौ को प्रज्वलित करती है। श्री सत्य सनातन अखाड़ा द्वारा आयोजित यह नवरात्रि समारोह सनातन परंपरा की जीवंत मिसाल है, जो समाज को धर्म, संस्कृति और सेवा से जोड़ता है।

25+

वर्षों से मनाई जा रही है

1M+

कुल भक्तजन

200+

स्वयंसेवकगण

1000+

सांस्कृतिक कार्यक्रम

देवियों की शक्ति

नवदुर्गा - नौ देवियाँ

माता दुर्गा के नौ दिव्य रूप जो आत्मा की यात्रा को दर्शाते हैं

माँ शैलपुत्री
Day 1

माँ शैलपुत्री

स्वरूप

पर्वतराज हिमालय की पुत्री, नंदी पर सवार, हाथ में त्रिशूल और कमल।

पूजा विधि

कलश स्थापना, गंगाजल से शुद्धि, लाल वस्त्र पहनाकर पूजन।

आशीर्वाद

साधक को शांति और शक्ति मिलती है।

मंत्र

ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः

माँ ब्रह्मचारिणी
Day 2

माँ ब्रह्मचारिणी

स्वरूप

हाथ में जपमाला और कमंडलु। तपस्या की प्रतीक।

पूजा विधि

सफेद वस्त्र अर्पित करें, चीनी और मिश्री का भोग लगाएँ।

आशीर्वाद

तप, त्याग, संयम और सफलता।

मंत्र

ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः

माँ चन्द्रघंटा
Day 3

माँ चन्द्रघंटा

स्वरूप

माथे पर अर्धचन्द्र, सिंह पर सवार, दस भुजाएँ।

पूजा विधि

पीले वस्त्र पहनाएँ, दूध से बनी मिठाई का भोग।

आशीर्वाद

साहस और निर्भयता की प्राप्ति।

मंत्र

ॐ देवी चन्द्रघंटायै नमः

माँ कूष्माण्डा
Day 4

माँ कूष्माण्डा

स्वरूप

ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति करने वाली, अष्टभुजा।

पूजा विधि

लाल या नारंगी वस्त्र अर्पित करें, मालपुआ का भोग।

आशीर्वाद

स्वास्थ्य, आयु और ऊर्जा में वृद्धि।

मंत्र

ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः

माँ स्कन्दमाता
Day 5

माँ स्कन्दमाता

स्वरूप

कार्तिकेय (स्कन्द) की माता, सिंह पर सवार।

पूजा विधि

पीले वस्त्र पहनाएँ, केले का भोग लगाएँ।

आशीर्वाद

संतान सुख और परिवार में समृद्धि।

मंत्र

ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः

माँ कात्यायनी
Day 6

माँ कात्यायनी

स्वरूप

चार भुजाएँ, सिंह पर सवारी, महिषासुर मर्दिनी।

पूजा विधि

लाल फूल और सुगंधित वस्त्र अर्पित करें, शहद का भोग।

आशीर्वाद

विवाह में आने वाली बाधाओं का निवारण।

मंत्र

ॐ देवी कात्यायन्यै नमः

माँ कालरात्रि
Day 7

माँ कालरात्रि

स्वरूप

अंधकारमय, केश खुले, भयंकर रूप।

पूजा विधि

नीले या काले वस्त्र चढ़ाएँ, गुड़ का भोग।

आशीर्वाद

शत्रुओं और भय का नाश, तंत्र-मंत्र से रक्षा।

मंत्र

ॐ देवी कालरात्र्यै नमः

माँ महागौरी
Day 8

माँ महागौरी

स्वरूप

अत्यंत उज्ज्वल, चार भुजाएँ, बैल पर सवारी।

पूजा विधि

सफेद वस्त्र पहनाएँ, नारियल का भोग।

आशीर्वाद

पवित्रता, सौभाग्य और उन्नति।

मंत्र

ॐ देवी महागौर्यै नमः

माँ सिद्धिदात्री
Day 9

माँ सिद्धिदात्री

स्वरूप

कमल पर विराजमान, चार भुजाएँ।

पूजा विधि

लाल पुष्प अर्पित करें, तिल और खीर का भोग।

आशीर्वाद

सिद्धि, ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति।

मंत्र

ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः

पवित्र क्षण

गैलरी

Navratri Gallery 1
Navratri Gallery 2
Navratri Gallery 3

विशेष अवलोकन

  1. नवरात्रि के प्रथम तिथि से मां आदिशक्ति का आव्हान, कलश यात्रा, घट व ज्वारा स्थापना, दीप एवं दिव्य अखंड धुना प्रज्वलित कर चुनरी यात्रा, माता श्रृंगार पूजन दिव्य महायज्ञ व अनुष्ठान पूर्ण विधिविधान के साथ आरंभ किया जाता हैं, तथा विसर्जन पूजा दशमी तिथि पर कन्या भोज के बाद विशेष शस्त्र पूजन मंत्रोउच्चारण द्वारा तथा नगर भ्रमण के साथ आयोजन का समापन किया जाता है।

  2. सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि पर चंडी महायज्ञ सम्पन्न किया जाएगा।