
शक्ति की उपासना एवं सांस्कृतिक महोत्सव
श्री सत्य सनातन अखाड़ा द्वारा प्रतिवर्ष चैत्र, शारदीय एवं गुप्त नवरात्रियों के पावन अवसर पर भव्य धार्मिक आयोजन अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव से किया जाता है। यह आयोजन आध्यात्मिक जागरण और सनातन परंपरा के संरक्षण का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। प्रत्येक वर्ष यह आयोजन श्रद्धालुजनों के लिए एक आध्यात्मिक पर्व जैसा होता है, जिसमें हजारों की संख्या में भक्तगण सम्मिलित होकर आयोजन की दिव्यता और भव्यता का आनन्द लेते हैं।
नवरात्रि की शुरुआत कलश यात्रा के साथ होती है, जिसमें भक्तगण भक्ति भाव से सराबोर होकर देवी का आवाहन करते हैं। इसके उपरांत अखंड दीप की स्थापना की जाती है जो पूरे नवरात्रि काल में प्रज्वलित रहता है, यह देवी माँ की कृपा का प्रतीक माना जाता है। यज्ञ, अनुष्ठान एवं वैदिक मंत्रोच्चार से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है।
माता का दिव्य श्रृंगार और पूजा विधिविधान से की जाती है, जिसमें माँ को चुनरी अर्पित की जाती है और भक्ति रस में डूबी चुनरी यात्रा का आयोजन होता है। श्रद्धालु भजन, कीर्तन, और आरती के माध्यम से अपनी आस्था प्रकट करते हैं। नव कन्या पूजन और कन्या भोज इस आयोजन का एक पवित्र अंग होता है, जिसमें कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर ससम्मान भोजन कराया जाता है।
इस अवसर पर श्री चंडी यज्ञ, श्री दुर्गा सप्तशती पाठ तथा नवदुर्गा पूजन अत्यंत विधिपूर्वक संपन्न होता है, जिससे वातावरण देवीमय हो उठता है। संपूर्ण आयोजन धर्म जागरण का माध्यम बनता है, जिसमें जनमानस को सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि एक आत्मिक अनुभूति है, जो भक्तों के हृदय में भक्ति, सेवा, और संस्कारों की लौ को प्रज्वलित करती है। श्री सत्य सनातन अखाड़ा द्वारा आयोजित यह नवरात्रि समारोह सनातन परंपरा की जीवंत मिसाल है, जो समाज को धर्म, संस्कृति और सेवा से जोड़ता है।
25+
वर्षों से मनाई जा रही है
1M+
कुल भक्तजन
200+
स्वयंसेवकगण
1000+
सांस्कृतिक कार्यक्रम
माता दुर्गा के नौ दिव्य रूप जो आत्मा की यात्रा को दर्शाते हैं

पर्वतराज हिमालय की पुत्री, नंदी पर सवार, हाथ में त्रिशूल और कमल।
कलश स्थापना, गंगाजल से शुद्धि, लाल वस्त्र पहनाकर पूजन।
साधक को शांति और शक्ति मिलती है।
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः

हाथ में जपमाला और कमंडलु। तपस्या की प्रतीक।
सफेद वस्त्र अर्पित करें, चीनी और मिश्री का भोग लगाएँ।
तप, त्याग, संयम और सफलता।
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः

माथे पर अर्धचन्द्र, सिंह पर सवार, दस भुजाएँ।
पीले वस्त्र पहनाएँ, दूध से बनी मिठाई का भोग।
साहस और निर्भयता की प्राप्ति।
ॐ देवी चन्द्रघंटायै नमः

ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति करने वाली, अष्टभुजा।
लाल या नारंगी वस्त्र अर्पित करें, मालपुआ का भोग।
स्वास्थ्य, आयु और ऊर्जा में वृद्धि।
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः

कार्तिकेय (स्कन्द) की माता, सिंह पर सवार।
पीले वस्त्र पहनाएँ, केले का भोग लगाएँ।
संतान सुख और परिवार में समृद्धि।
ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः

चार भुजाएँ, सिंह पर सवारी, महिषासुर मर्दिनी।
लाल फूल और सुगंधित वस्त्र अर्पित करें, शहद का भोग।
विवाह में आने वाली बाधाओं का निवारण।
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः

अंधकारमय, केश खुले, भयंकर रूप।
नीले या काले वस्त्र चढ़ाएँ, गुड़ का भोग।
शत्रुओं और भय का नाश, तंत्र-मंत्र से रक्षा।
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः

अत्यंत उज्ज्वल, चार भुजाएँ, बैल पर सवारी।
सफेद वस्त्र पहनाएँ, नारियल का भोग।
पवित्रता, सौभाग्य और उन्नति।
ॐ देवी महागौर्यै नमः

कमल पर विराजमान, चार भुजाएँ।
लाल पुष्प अर्पित करें, तिल और खीर का भोग।
सिद्धि, ज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति।
ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः



नवरात्रि के प्रथम तिथि से मां आदिशक्ति का आव्हान, कलश यात्रा, घट व ज्वारा स्थापना, दीप एवं दिव्य अखंड धुना प्रज्वलित कर चुनरी यात्रा, माता श्रृंगार पूजन दिव्य महायज्ञ व अनुष्ठान पूर्ण विधिविधान के साथ आरंभ किया जाता हैं, तथा विसर्जन पूजा दशमी तिथि पर कन्या भोज के बाद विशेष शस्त्र पूजन मंत्रोउच्चारण द्वारा तथा नगर भ्रमण के साथ आयोजन का समापन किया जाता है।
सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि पर चंडी महायज्ञ सम्पन्न किया जाएगा।